बुरा इंसान

Version française

बुरा इंसान

Langue : hindi, avec refrain en anglais
Texte : Paroles originales

बुरा इंसान, de l’album I Am Bad, transforme l’étiquette de la « mauvaise personne » en affirmation de dignité et de liberté. Le texte oppose le corps visible et l’amour assumé aux notions d’izzat, de respectabilité familiale, de sanskar et au poids du « qu’en-dira-t-on », qui imposent souvent le silence. De Delhi à Mumbai, Lucknow et Bhopal, la fierté prend la forme très concrète de marcher, se nommer et tenir une main sans se cacher. Ici, vivre pleinement signifie refuser que la honte ou le regard social décide de ce qu’un être humain a le droit d’être.

English Version

बुरा इंसान

Language: Hindi, with an English refrain
Text: Original lyrics

बुरा इंसान, from the album I Am Bad, reclaims the label of the “bad person” as a declaration of dignity and freedom. Visible bodies and openly lived love are set against ideas of izzat, family respectability, sanskar, and the pressure of “what will people say,” all of which can demand silence and concealment. From Delhi and Mumbai to Lucknow and Bhopal, pride becomes something tangible: walking openly, speaking one’s name, and holding another hand without hiding. The song insists that neither shame nor social judgment should determine a person’s right to exist and love.

한국어 버전

बुरा इंसान

언어: 힌디어, 영어 후렴 포함
가사: 오리지널 가사

앨범 I Am Badबुरा इंसान은 ‘나쁜 사람’이라는 낙인을 존엄과 자유의 선언으로 되찾는 노래다. 드러난 몸과 숨기지 않는 사랑은 izzat이라 불리는 명예, 가족의 체면, sanskar와 같은 전통적 가치, 그리고 ‘남들이 뭐라고 할까’라는 압력과 맞선다. 델리, 뭄바이, 러크나우, 보팔의 이미지는 자긍심을 거리에서 자기 이름을 말하고, 손을 잡고, 숨지 않는 구체적인 행위로 보여 준다. 이 노래에서 자유란 수치심이나 사회의 시선이 한 사람의 존재와 사랑을 결정하도록 내버려 두지 않는 것이다.

बुरा इंसान


I am bad, I am bad
पर ये लफ़्ज़ अब मेरा गला नहीं घोंटता
I am bad, I am bad
आज मैं छिपता नहीं, सड़क पर उतरता

I am bad, I am bad
अब न चुप, न आधा, न डरा हुआ
I am bad, I am bad
ये जीवन मेरा है, मेरा हुआ


उँगलियाँ उठती हैं बीच सड़क पर
देखो इसके कपड़े, देखो ये मेकअप
इतना रंग, इतनी चमक, इतना शोर
इतनी चाहत, जैसे हो कोई दोष

वे कहते हैं, “इसमें गर्व कहाँ है?”
“इतना दिखावा, इतनी ज़िद क्यों है?”
“जो करना है, घर के अंदर करो”
“आज़ाद रहो, पर नज़र से दूर रहो”

वे कहते हैं इज़्ज़त, मर्यादा, संस्कार
परिवार का नाम, रिश्तेदारों का व्यवहार
मोहल्ले की बातें, लोग क्या कहेंगे
जैसे प्यार हो गुनाह, और हम दोष सहेंगे

पर मैं कहता हूँ, हाँ, मैं भी नाज़ुक हूँ
काँपता हूँ, टूटता हूँ, कभी चुप हूँ
जो मैं पूरे हफ़्ते सीने में छिपाता
आज उसे इंद्रधनुष की आग बनाकर पहनता

मैं तुम्हारी नज़र के लिए नहीं जीता
तुम्हारी चुप्पी के लिए नहीं मिटता
अगर शरीफ़ रहना धीरे-धीरे मरना है
तो मैं सड़क चुनूँगा, मुझे खुलकर चलना है

I am bad, हाँ, मैं पहले कहता हूँ
तुम्हारी गाली को अपनी धुन में रखता हूँ
मेरा नाम शर्म के कमरे में सोया था
आज beat उसे जगाता है, दुनिया ने सुना था


I am bad, I am bad
पर मैं ग़लत पैदा नहीं हुआ
I am bad, I am bad
मेरे ज़ख्म से ताज उगा

I am bad, I am bad
मैं कोमल हूँ, फिर भी खड़ा हूँ
I am bad, I am bad
मैं नाचता हूँ, प्यार करता हूँ, ज़िंदा हूँ


I am bad, I am bad
तुम्हारा label मेरा सिंहासन
I am bad, I am bad
मेरी दरार अब मेरा आभूषण

I am bad, I am bad
अब ज़मीन के नीचे साँस नहीं लेता
I am bad, I am bad
भीड़ में मेरा नाम पुकारो


छिपी हुई ज़िंदगी लंबा गलियारा
बंद दरवाज़े, कम हवा, कोई सितारा
हर आईना मुझसे आँख चुराता
हर प्यार नया चेहरा लगाकर आता

वे कहते हैं, “चुप रहो, सुरक्षित रहोगे”
“दिखोगे नहीं, तो चैन से जी लोगे”
पर कैसी आज़ादी बचती है मेरे पास
अगर साँस लेने को भी बोलना पड़े झूठ हर बार

“ठीक है, मैं सुनता हूँ”
“तुम जैसे हो, वैसे हो”
इतना छोटा वाक्य
किसी को जीवन दे सकता है

“ठीक है, मैं सुनता हूँ”
“तुम जैसे हो, वैसे हो”
कभी हल्की स्वीकृति
सबसे गहरी दवा होती है


स्कूल के मैदान में आँखें बुझती देखीं
एक नरम बच्चा अपनी आवाज़ छिपाता देखा
शरीर बदलता, आवाज़ भारी होती
दुनिया कहती, “अब मर्द बनो, ऐसे नहीं”

तब हमारे पास शब्द नहीं थे
न queer, न trans, न कोई theory
पर बच्चे कभी साफ़ समझते हैं
इंसान मरम्मत के लिए पैदा नहीं होते

शर्म कहती थी, “तुम ठीक नहीं”
शर्म कहती थी, “ज़्यादा मत दिखो”
शर्म कहती थी, “घर की नाक मत कटाओ”
“सामान्य बनो, नहीं तो गायब हो जाओ”

पर मैं आज वह वाक्य फिर लिखता हूँ
मैं कोई भूल नहीं, मैं कोई दाग़ नहीं
मैं अभी सीख रहा हूँ टिके रहना
अपना नाम बिना डर के कहना

ग़लत शरीर नहीं होते
घायल करने वाली नज़रें होती हैं
गंदे प्यार नहीं होते
डर से बनी हुई दीवारें होती हैं

गर्व कोई पदक नहीं
सिर्फ़ बेदाग़ लोगों के लिए
गर्व है टूटे हुए इंसान का
अपने टुकड़ों को फिर से जोड़ना

गर्व सिर्फ़ parade और रंग नहीं
सिर्फ़ music, dance और नारे नहीं
गर्व है अलमारी से बाहर आना
और पहली बार पूरी साँस लेना

गर्व है दिल्ली की सड़क पर चलना
मुंबई की बारिश में न रुकना
लखनऊ की गली में नाम कहना
भोपाल की रात में हाथ पकड़ना

गर्व है माँ का डरते हुए सुनना
पिता का धीरे-धीरे बदलना
बहन का कहना, “मैं तेरे साथ हूँ”
भाई का चुपचाप दरवाज़ा खोलना

कानून काग़ज़ पर कुछ भी लिखे
मुझे इज़्ज़त चाहिए अपनी त्वचा पर
मेरे नाच में, मेरे नाम में
मेरे प्यार में, मेरे अधिकार में

तुम पूछते हो, “इस शोर में गर्व कहाँ?”
“इस कपड़े, इस नाच, इस चाहत में क्या?”
गर्व यहीं है, मेरे इंकार में
तुम्हारी शर्म के सामने मेरे खड़े रहने में

I am bad, हाँ, फिर कहता हूँ
अब ये शब्द मेरी जेल नहीं
तुमने इसे फ़ैसला बनाकर लिखा
मैं इसे गाना बनाकर जीता हूँ


I am bad, I am bad
पर मैं ग़लत पैदा नहीं हुआ
I am bad, I am bad
मेरे ज़ख्म से ताज उगा

I am bad, I am bad
मैं कोमल हूँ, फिर भी खड़ा हूँ
I am bad, I am bad
मैं नाचता हूँ, प्यार करता हूँ, ज़िंदा हूँ


I am bad, I am bad
तुम्हारा label मेरा सिंहासन
I am bad, I am bad
मेरी दरार अब मेरा आभूषण

I am bad, I am bad
अब ज़मीन के नीचे साँस नहीं लेता
I am bad, I am bad
भीड़ में मेरा नाम पुकारो

[Outro]
I am bad
फिर भी मैं हूँ
I am bad
फिर भी मैं चमकता हूँ

I am bad
फिर भी मैं प्यार करता हूँ
आज मैं नहीं छिपता
यह ज़िंदगी मेरी है

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